+ अब लेश्या के भेद से आराधना में भेद होता है, उनका निरूपण करते हैं - -
सुक्काए लेस्साए उक्कस्सं अंसयं परिणमित्ता ।
जो मरदि सो हु णियमा उक्कस्साराधओ होइ॥1925॥
शुक्ल लेश्या के सर्वाेत्तम अंशरूप परिणमन करे ।
मरण प्राप्त वह क्षपक नियम से सर्वाेत्तम आराधक है॥1925॥
अन्वयार्थ : शुक्ललेश्या के उत्कृष्ट अंशरूप परिणामों में मरण हो, वह नियम से उत्कृष्ट आराधना का धारक होता है ।

  सदासुखदासजी