जे सेसा सुक्काए दु अंसया जे य पम्मलेस्साए ।
तल्लेस्सापरिणामो दुमज्झमाराधणा मरणे॥1927॥
मध्यम और जघन्य अंश हों शुक्ल लेश्यामय परिणाम ।
उत्तम मध्यम जघन पद्म के तो मध्यम आराधक जान॥1927॥
अन्वयार्थ : अवशेष रहे जो शुक्ललेश्या के अंश और पद्मलेश्या के बाकी के अंश हैं, उनरूप परिणाम मरणकाल में हों, वे मध्यम आराधना के हैं ।

  सदासुखदासजी