तेजाए लेस्साए ये अंसा तेसु जो परिणमित्ता ।
कालं करेइ तस्स हु जहण्णियाराधण भणिदा॥1928॥
पीत लेश्या के अंशों में परिणमता जो मृत्यु वरे ।
यह जघन्य आराधक मुनि हैं कहते हैं जिनराज अरे॥1928॥
अन्वयार्थ : और ये तेजोलेश्या के अंश हैं, उन रूप परिणामों में मरण हो तो वह जघन्य आराधना है, ऐसा परमागम में कहा गया है ।

  सदासुखदासजी