
जो जाए परिणिमित्ता लेस्साए संजुदो कुणइ कालं ।
तल्लेसो उववज्जइ तल्लेस्से चेव सो सग्गे॥1929॥
जैसी लेश्या परिणति पाकर क्षपक मृत्यु को वरते हैं ।
वैसी लेश्या युक्त स्वर्ग में वैसे ही सुर होते हैं॥1929॥
अन्वयार्थ : जिस संयमी का जैसी लेश्यारूप अपने परिणामों में मरण हो, वह वैसी ही लेश्या वाले स्वर्ग में उस लेश्या का धारक देव होता है ।
सदासुखदासजी