
अध तेउपउमसुक्कं अदिच्छिदो णाणदंसणसमग्गो ।
आउक्खया दु सुद्धो गच्छदि सुद्धिं चुयकि लेसो॥1930॥
शुभ लेश्या तज लेश्याहीन अयोगी दर्शन ज्ञान सहित ।
आयु पूर्ण कर मुक्ति प्राप्त कर नष्ट करे वह सर्व क्लेश॥1930॥
अन्वयार्थ : और जो तेजोलेश्या, पद्मलेश्या, शुक्ललेश्या का उल्लंघन करके लेश्या के अभाव को प्राप्त हुए, वे ज्ञान-दर्शन की पूर्णता को प्राप्त करके आयु का क्षय होते ही समस्त क्लेश रहित शुद्ध हुए निर्वाण को प्राप्त होते हैं ।
इति सविचारभक्तप्रत्याख्यानमरण के चालीस अधिकारों में लेश्या नामक अडतीसवाँ अधिकार अठारह गाथाओं में पूर्ण हुआ ।
सदासुखदासजी