इयमुक्कस्सियमाराधणमणुपालेत्तु केवली भविया ।
लोगग्गसिहरवासी हवंति सिद्धा धुयकिलेसा॥1936॥
इसप्रकार सर्वाेत्तम आराधन का करके अनुपालन ।
क्लेश मुक्त हो लोक-शिखरवासी होते केवलि भगवन॥1936॥
अन्वयार्थ : इसप्रकार उत्कृष्ट आराधना को अनुक्रम से पालकर, केवलज्ञानी होकर और समस्तकर्म बन्धरूप क्लेश को उडाकर लोकाग्र शिखर में बसने वाले सिद्ध होते हैं ।

  सदासुखदासजी