पंचसमिदा तिगुत्ता सुसंवुडा सव्वसंगउम्मुक्का ।
धीरा अदीणमणसा समसुहदुक्खा असंमूढा॥1938॥
पाँच समिति त्रय गुप्ति सुसंवृत सर्व संग का कर परित्याग ।
धीर अदीन अमूढ़ रहें वे सुख-दुःख में वर्ते समभाव॥1938॥

  सदासुखदासजी