भोगे अणुत्तरे भुंजिऊण तत्तो चुदा सुमाणुस्से ।
इढ्ढिमतुलं चइत्ता चरंति जिणदेसिय धम्मं॥1949॥
स्वर्ग सुखों को भोग वहाँ से च्युत होकर नरजन्म गहें ।
सब एेश्वर्य भोगकर जिनवर कथित धर्म आचरण करें॥1949॥

  सदासुखदासजी