पं-सदासुखदासजी
इय चरणमधक्खादं पडिवण्णा सुद्धदंसमुवेदा ।
सोधंति ज्झाणजुत्ता लेस्साओ संकिलिठ्ठाओ॥1951॥
सम्यग्दर्शन शुद्ध और क्षायिक चारित्र वे मुनि धारें ।
होकर ध्यान मग्न क्लेशमय अशुभ लेश्या नष्ट करें॥1951॥
सदासुखदासजी