सुहसादा किंमज्झा गुणसायी पावसुत्तपडिसेवी ।
विसयासापडिबद्धा गारवगरुया पमाइल्ला॥1959॥
सुखशीली, उत्साह हीन अरु आदर रहित, पाप सेवी ।
विषयाशा प्रतिबद्ध तीव्र मंद गारव सहित प्रमादी हैं॥1959॥

  सदासुखदासजी