पं-सदासुखदासजी
समिदीसु य गुत्तीसु य अभाविदा सीलसंजम गुणेसु ।
परतत्तीसु पसत्ता अणाहिदा भावसुद्धीए॥1960॥
समिति गुप्ति अरु संयमशील गुणों में भाव-विहीन रहें ।
लौकिक कायाब में लीन रहें अरु भाव-शुद्धि पर ध्यान न दें॥1960॥
सदासुखदासजी