परलोगणिप्पिवासा इहलोगे चेव जे सुपडिबद्धा ।
सज्झायादीसु य जे अणुट्ठिदा संकिलिठ्ठमदी॥1962॥
पर-भव की चिन्ता न करें जो कार्य करें इस भव के ही ।
स्वाध्याय में अनुद्यमी हों रहे बुद्धि संक्लेश मयी॥1962॥

  सदासुखदासजी