एवं मूढमदीया अवंतदोसा करेंति जे कालं ।
ते देव दुब्भगत्तं मायामोसेण पावंति॥1964॥
इसप्रकार वे मूढ़ बुद्धि दोषों का करें नहीं परिहार ।
मृत्यु प्राप्तकर मायाचारी से होते हैं देव-अभाग॥1964॥
अन्वयार्थ : ऐसे जो पूर्वोक्त प्रकार मूढबुद्धि, नहीं वमन किये हैं दोष जिनने, ऐसे दोषों के धारक जो काल करे हैं/मरण करते हैं; वे मायाचार करके, असत्य वचन द्वारा देव दुर्भगता अर्थात् नीच देवों में उत्पन्न होते हैं ।

  सदासुखदासजी