+ अब क्षपक का मृतक शरीर रहा, उसे क्षेपने के विधान का वर्णन जिसमें है - ऐसा विजहना नामक चालीसवाँ अधिकार पैंतीस गाथाओं द्वारा कहते हैं - -
एवं कालगदस्स दु सरीरमंतोबहिज्ज बाहिं वा ।
विज्जावच्चकरा तं सयं विकिंचंति जदणाए॥1973॥
नगर-मध्य या नगर-बाह्य में मरण प्राप्त मुनिवर की देह ।
वैयावृत्त करने वाले परिचारक स्वयं हटा देते॥1973॥
अन्वयार्थ : ऐसे पूर्वोक्त प्रकार से मरण को प्राप्त हुए क्षपक, उनके शरीर में या बाहर में यदि कफ-मलादि हो तो वैयावृत्त्य करने वाले यत्नाचार पूर्वक उसको दूर करते हैं ।

  सदासुखदासजी