+ अब निषीधिका कैसी होती है, उसे कहते हैं - -
एगंता सालोगा णादिविकिठ्ठा ण चावि आसण्णा ।
वित्थिण्णा विद्धत्ता णिसीहिया दूरमागाढा॥1975॥
हो एकान्त जगह में जहाँ न अन्य मनुज गण देख सकें ।
नहीं दूर या पास नगर के विस्तृत प्रासुक अति दृढ़ हो॥1975॥

  सदासुखदासजी