
जा अवरदक्खिणाए व दक्खिणाए व अध व अवराए ।
वसधीदो वण्णिज्जदि णिसीधिवा सा पसत्थत्ति॥1977॥
क्षपकस्थान से वह निषीधिका पश्चिम-दक्षिणदिशि में हो ।
अथवा दक्षिण या पश्चिम में हो तो उसको श्रेष्ठ कहें॥1977॥
अन्वयार्थ : जो निषीधिका हो, वह वसति, नगर, ग्राम के पश्चिम-दक्षिण के बीच नैऋत्यविदिशा में या दक्षिण दिशा में अथवा पश्चिम दिशा में हो - ऐसा वर्णन किया है । इन तीन दिशाओं में निषीधिका प्रशंसा योग्य कही गई है ।
सदासुखदासजी