एदासु फलं कमसो जाणेज्ज तुमंतुमा य कलहो य ।
भेदो य गिलाणं वि य चरिमा पुण कढ्ढदे अण्णं॥1980॥
इसके फल में क्रमशः संघ में तू-तू मैं-मैं हो संघर्ष ।
कलह, भेद अरु ग्लानि पक्ष अरु रोग-व्याधि भी हो जावे॥1980॥
अन्वयार्थ : इनका फल क्रम से ऐसा जानना - आग्नेयविदिशा में वसतिका प्राप्त हो तो आगाने अर्थात् आगे (भविष्य में) संघ में ईर्ष्या होगी । पवनविदिशा/वायव्यविदिशा में प्राप्त हो तो ऐसा जानना कि संघ में कलह होगी । पूर्वदिशा में प्राप्त हो तो संघ में भेद पडेगा - ऐसा फल जानना । उत्तर में निषीधिका प्राप्त हो तो जानना संघ में रोग-व्याधि होगी । ईशानविदिशा में निषीधिका प्राप्त हो तो संघ में परस्पर में पक्षपात बढेगा - ऐसा फल जानना ।

  सदासुखदासजी