
जं वेलं कालगदो भिक्खू तं वेलमेव णीहरणं ।
जग्गण बंधणछेदणविधी अवेलाए कादव्वा॥1981॥
मृत्यु क्षपक की जब होवे तत्काल हटायें उसकी देह ।
असमय में यदि मृत्यु हुई, छेदन बन्धन जागरण करें॥1981॥
अन्वयार्थ : जिस समय साधु का मरण हो, उसी समय उनके देह को निकासना - ले जाना और यदि ले जाने का अवसर न हो, रात्रि इत्यादि का अवसर हो तो जागरण, बन्धन, छेदन - ये तीन विधि करना ।
सदासुखदासजी