+ जागते रहें, यह कहते हैं - -
वाले बुढ्ढे सीसे तवस्सिभीरुगिलाणए दुहिदे ।
आयरिए य विकिंचिय धीरा जग्गंति जिदणिद्दा॥1982॥
बाल, वृद्ध, शिक्षक, तपसी, रोगी एवं भयभीत मुनि ।
दुःखी गणी को छोड़ धीर निद्राविजयी जागरण करें॥1982॥
अन्वयार्थ : बाल मुनि, वृद्ध मुनि, नवीन शिक्षक मुनि, बहुत तपश्चरण करने में उद्यमी ऐसे तपस्वी मुनि; कायरस्वभाव के धारक भीरु मुनि, व्याधिसहित रोगी मुनि तथा वेदना से दु:खित मुनि और आचार्य मुनि इनको छोडकर, धीर, वीर, निद्रा को जीतने वाले मुनि क्षपक हैं, वे मृतक शरीर के निकट जागरण करते हैं ।

  सदासुखदासजी