+ कैसे मुनि बन्धन करते हैं, यह कहते हैं - -
गीदत्था कदकज्जा महाबलपरक्कमा महासत्ता ।
बंधंति य छिंदंति य करचणंगुठ्ठयपदेसे॥1983॥
गृहीतार्थ कृतकर्म महाबल सत्त्वशील मुनि पराक्रमी ।
मृतक देह के हाथ पैर अँगूठे को छेदें वे मुनि॥1983॥
अन्वयार्थ : ग्रहण किया है पदार्थ का सत्यार्थ स्वरूप जिनने, ऐसे और किये हैं करण जिनने, महान है बल-पराक्रम जिनमें और महान आत्मवीर्य के धारक, ऐसे मुनि वे क्षपक के शरीर के हस्त या पाद के अंगुष्ठ का किंचित् प्रदेश/थोडे-से भाग को बाँध दें अथवा छेद दें । यहाँ कोई कहे कि मृतक मुनि के अंगुष्ठ के प्रदेश को कैसे (क्यों) बांधना ? कैसे (क्यों) छेदना? उसका उत्तर यह है कि इतना सामान्य ही यहाँ लिखा है । विशेष अन्य ग्रंथों से जानने में आया नहीं; क्योंकि सूत्र की आज्ञा बिना विशेष लिखा नहीं जा सकता, इसलिए जैसा भगवान ज्ञानी ने देखा, वैसा ही प्रमाण है ।

  सदासुखदासजी