उयसयपडियावण्णं उवसंगहिदं तु तत्थ उवकरणं ।1
सागारियं च दुविहं पडिहारिय मपडिहारिं वा॥1985॥
कुछ उपकरण वसतिका के कुछ सागारों से लाए गए ।
कुछ होते लौटाने लायक कुछ लौटाने योग्य नहीं॥1985॥
अन्वयार्थ : इस गाथा का अर्थ हमारे जानने में नहीं आया और टीकाकार ने भी नहीं लिखा है । जो बहुज्ञानी हों, वे समझकर अर्थ जानना ।

  सदासुखदासजी