
जदि विक्खादा भत्तपइण्णा अज्जाव होज्ज कालगदो ।2
देहलसागारित्ति व सितवियाकरणंपि तो होज्ज॥1986॥
भक्त प्रतिज्ञामरण प्राप्त करनेवाली यदि आर्यिका हो ।
तथा गृहस्था और रक्षिका हो, शिविका निर्माण करें॥1986॥
अन्वयार्थ : मुनीश्वरों का या आर्यिका का समाधिमरण प्रगट जाहिर हो गया है तो मुनि के समाधिमरण करने की उस वसतिका के स्वामी या अन्य गृहस्थजन आकर मुनि के देह को ले जाने के लिये शिविका/पालकी/रथ बनायें ।
सदासुखदासजी