+ उस क्षेत्र में घास-तृण न हो तो भूमि को सम कैसे करना, यह कहते हैं - -
जत्थ ण होज्ज तणाइं चुण्णेहिं वि तत्थ केसरेहिं वा ।
संघरिदव्वा लेहा सव्वत्थ समा अवोच्छिण्णा॥1991॥
जहाँ घास नहिं मिले वहाँ प्रासुक चन्दन का चूर्ण करे ।
अथवा केसर से समतल में संस्तर का निर्माण करे॥1991॥
अन्वयार्थ : जहाँ भूमि सम करने के लिये डाभ/घास/तृण न हो तो ईंटों के चूर्ण करके या वृक्षों के शुष्क केसर के द्वारा सर्वत्र समान, छेद रहित भूमि करें और यदि भूमि समान न हो तो निमित्तज्ञानियों ने आगे ऐसा होना देखा है ।

  सदासुखदासजी