
जदि विसमो संथारो उवरिं मज्झे व होज्ज हेट्ठा वा ।
मरणं व गिलाणं वा गणिवसभजदीण णायव्वं॥1992॥
यदि संस्तर ऊपर मध्यम या जघन दिशा में विषम रहे ।
तो क्रमशः आचार्य, मुख्य मुनि अन्य यति हों मृत/रोगी॥1992॥
अन्वयार्थ : यदि संस्तर ऊपरी भाग में विषम हो, सम न हो तो ऐसा जानना कि संघ के आचार्य का मरण होगा या आचार्यों को रोग होगा । यदि मध्य में विषम हो, तो जानना संघ में कोई यति प्रधान मुनि का मरण या व्याधि-रोग होगा और यदि नीचे विषम हो तो जानना कोई यति का मरण होगा या रोग होगा - ऐसा निमित्तज्ञान से जानते हैं ।
सदासुखदासजी