सदभिसमरणा अद्दा सादा असलेस्स जिट्ठ अदखरा ।
रोहिणिविसाहपुणव्वसुत्तिउत्तरा मज्झिमासेसा॥1996॥
शतभिष भरणी आर्द्रा स्वाति आश्लेषा ज्येष्ठा हैं निम्न ।
पुनर्वसु रोहिणी विशाखा फाल मुनि भाद्र अषाढ़ोत्तम॥1996॥
अन्वयार्थ : जघन्य नक्षत्र में आराधना के धारक का मरण हो तो जानना कि समस्त संघ का कल्याण होगा, मध्यम नक्षत्र में मरण हो तो एक का मरण और होगा तथा महान नक्षत्र में मरण हो तो दो का मरण और होगा ऐसा जानना ।1

  सदासुखदासजी