
तठ्ठाणसावणं चिय तिक्खुत्तो ठविय मडयपासम्मि ।3
विदिय वियप्पिय भिक्खू कुज्जा तह विदितदियाणं॥1998॥
मृतक समीप रखें पुतला त्रय बार कहें ऊँचे स्वर से ।
ये पुतले जिनके बदले में वे चिरजीवी तपसी हों॥1998॥
अन्वयार्थ : उस स्थान में मृतक के निकट तृणमय पिंड की स्थापना करके "द्वितीयोऽर्पित:" ऐसा कहें तथा द्वितीय, तृतीय स्थापन किया - ऐसा कहकर दो तृणमय पुतले रखें ।
सदासुखदासजी