
सगणत्थे कालगदे खमणमसज्झाइयं च तद्दिवसं ।
सज्झाइ परगणत्थे भयणिज्जं खमणकरणेपि॥2002॥
निज संघस्थ मरण दिन में स्वाध्याय नहीं, उपवास करें ।
पर-संघस्थ मरण हो तो स्वाध्याय नियम से त्याग करें॥2002॥
अन्वयार्थ : अपने गण में रहने वाले क्षपक का समाधिमरण होने पर उस दिन समस्त संघ उपवास करें और उस दिन स्वाध्याय भी नहीं करें । परगण/दूसरे संघ में रहने वाले मुनि का मरण हो जाये तो स्वाध्याय नहीं करें और उपवास भजनीय है, करें अथवा नहीं करें ।
सदासुखदासजी