
एदं पडिट्ठवित्ता पुणो वि तदियदिवसे उवेक्खंति ।
संघस्स सुहविहारं तरस गदी चेव णादंुजे॥2003॥
क्षपक शरीर करें स्थापित और तीसरे दिन देखें ।
हो या नहिं सुविहार संघ का और मृतक की गति कैसी॥2003॥
अन्वयार्थ : इस प्रकार क्षपक के शरीर को स्थापन करके, तीसरे दिन कोई निमित्त को जानने वाले, संघ का सुखरूप विहार जानने को और क्षपक की गति जानने को तीसरे दिन क्षपक के शरीर का अवलोकन करें/क्षपक के शव को देखना चाहिए ।
सदासुखदासजी