
जदिदिवसे संचिट्ठदि तमणालद्धं च अक्खंद मडयं ।
तदिवरिसाणि सुभिक्खं खेमसियं तम्हि रज्जम्मि॥2004॥
जितने दिन तक रहे सुरक्षित वह शव वनचर पशुओं से ।
उतने वषाब तक सुभिक्ष अरु शान्ति रहेगी उस थल में॥2004॥
अन्वयार्थ : जितने दिन तक क्षपक का मृतक शरीर वन के जीवों से अखंड बचा रहे, वन के जीव भक्षण नहीं करें, उतने वर्ष तक उस राज्य में सुभिक्ष - क्षेत्र कल्याण रहता है । ऐसा निमित्त-ज्ञान से जानते हैं ।
सदासुखदासजी