+ अब सविचारभक्तप्रत्याख्यान मरण की महिमा नौ गाथाओं में कहते हैं - -
ते सूरा भयवंता आहच्चइदूण संघमज्झम्मि ।
आराधणापडायं चउप्पयारा हिदा जेहिं॥2008॥
जिनने संघ समक्ष प्रतिज्ञा करके चौ आराधन की ।
ध्वजा ग्रहण की शूरवीर भगवन्त धन्य हैं पूज्य वही॥2008॥
अन्वयार्थ : जो शूरवीर ज्ञानवंत संघ के मध्य प्रतिज्ञा करके चार प्रकार की आराधना पताका ग्रहण करते हैं, वे जगत में धन्य हैं ।

  सदासुखदासजी