
ते धण्णा ते णाणी लद्धो लाभो य तेहिं सव्वेहिं ।
आराधणा भयवदी सयला आराधिदा जेहिं॥2009॥
आराधना भगवती पाकर पूर्ण रूप से आराधी ।
वे ज्ञानी हैं धन्य उन्होंने सर्व लाभ है प्राप्त किया॥2009॥
अन्वयार्थ : जिनने यह भगवान संबंधी आराधना पायी, वे धन्य हैं, वे ज्ञानवंत हैं । उनने समस्त लाभ पाया, जो आराधना अनंतकाल में भी नहीं प्राप्त की । इस समान तीन लोक में और कोई लाभ नहींहै ।
सदासुखदासजी