किं णाम तेहिं लोगे महाणुभावेहिं हुज्ज ण य पत्तं ।
आराधणा भगवदी सयला आराधिदा जेहिं॥2010॥
अहो जिन्होंने पूर्ण भगवती आराधना ग्रहण कर ली ।
महानुभाव ने जग में सिद्धि कहो कौन जो प्राप्त न की॥2010॥
अन्वयार्थ : इस लोक में जिस आराधना को महाप्रभाववान पुरुष भी नहीं प्राप्त कर सके, ऐसी भगवान सर्वज्ञ कथित आराधना की जिसने सर्वप्रकार से आराधना की, उनकी महिमा का क्या कहना?

  सदासुखदासजी