
सविचारभक्तवोसरणमेवमुववण्णिदं सवित्थारं ।
अविचारभक्तपच्चक्खाणं एत्तो परं वुच्छं॥2017॥
सविचार भक्त प्रत्याख्यान का कर विचार यह किया कथन ।
अविचार भक्त प्रत्याख्यान का अब करते हैं यहाँ कथन॥2017॥
अन्वयार्थ : इसप्रकार सविचारभक्तप्रत्याख्यानमरण का विस्तारसहित वर्णन किया । अब आगे अविचारभक्तप्रत्याख्यानमरण को कहूँगा ।
सदासुखदासजी