पं-सदासुखदासजी
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अब निरुद्धभक्तप्रत्याख्यानमरण पंच गाथाओं में कहते हैं । उनमें निरुद्ध मुनि ऐसे होते हैं -
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तस्स णिरुद्धं भणिदं रोगादंकेहिं जो समभिभूदो ।
जंघाबलपरिहीणो परगणगमणम्मि ण समत्थो॥2020॥
जो मुनिवर हों रोग ग्रस्त अरु चलने में भी हों असमर्थ ।
जा न सकें जो अन्य संघ में वे स्वीकारें प्रथम निरुद्ध॥2020॥
सदासुखदासजी