दुविधं तं पि अणीहारिमं पगासं च अप्पगासं च ।
जणणादं च पगासं इदरं च जणेण अण्णादं॥2023॥
यह अनिहार प्रत्याख्यान प्रकाश और अप्रकाश स्वरूप ।
जनगण में जो ज्ञात और अज्ञात प्रकाश-अप्रकाश स्वरूप॥2023॥
अन्वयार्थ : अविचारभक्तप्रत्याख्यानमरण दो प्रकार का है - एक प्रकाश और दूसरा एक अप्रकाश । उनमें से लोक जिसे जानते हों, वह प्रकाश है और जो लोकों में विख्यात न हो, वह अप्रकाश है ।

  सदासुखदासजी