पं-सदासुखदासजी
+
अब निरुद्धतर नाम के दूसरे भेद को चार गाथाओं में वर्णन करते हैं -
-
बालग्गिवग्घमहिसगयरिंछ पडिणीय तेण मेच्छेहिं ।
मुच्छाविसूचियादीहिं होज्ज सज्जो हु वावत्ती॥2025॥
सर्प अग्नि भैसा हाथी अरु व्याघ्र रीछ शत्रु आये ।
अथवा मूर्च्छा या विसूचिका से यदि मरण उपस्थित हों॥2025॥
सदासुखदासजी