णच्चा संवट्टिज्जं तमाउगं सिग्घमेव तो भिक्खू ।
अरहंतसिद्धसाहूण अंतिगे सिग्घमालोचे॥2030॥
तब वह साधू शीघ्र आयु का क्षय होनेवाला जाने ।
अर्हंत सिद्ध साधु निकट जा आलोचन करे तत्काल॥2030॥
अन्वयार्थ : पूर्वोक्त प्रसंग उपस्थित होने के बाद भिक्षु/साधु अपनी आयु शीघ्र संकुचित/क्षय होती जानकर अपने मन में ही अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु से आलोचना कर लें ।

  सदासुखदासजी