
एवं आसुक्कारमरणे वि सिज्झंति केइ धुदकम्मा ।
आराधयित्तु केई देवा वेमाणिया होंति॥2032॥
मरण अचानक हो फिर भी कोई मुनि कर्म कलंक नशें ।
और कोई मुनि आराधन करके वैमानिक देव बसें॥2032॥
अन्वयार्थ : इस प्रकार शीघ्र मरण होते ही कितने ही महामुनि शुक्लध्यान द्वारा कर्म का क्षय करके सिद्धि को प्राप्त हो जाते हैं और कोई आराधना आराधकर वैमानिक देव होते हैं ।
सदासुखदासजी