
सोलसतित्थयराणं तित्थुप्पण्णस्स पढमदिवसम्मि ।
सामण्णणाणसिद्धि भिण्णमुहुत्तेण संपण्णा॥2035॥
ऋषभदेव से शान्तिनाथ तक तीर्थाेत्पत्ति प्रथम दिवस ।
दीक्षा लेकर बहुत साधु अन्तर्मुहूर्त में मुक्त हुए॥2035॥
अन्वयार्थ : षोडश तीर्थंकरों के तीर्थ में उत्पन्न हुए साधुओं ने दीक्षा ली, उसी प्रथम दिवस में ही अन्तर्मुहूर्त में सामान्यज्ञान की सिद्धि प्राप्त की । इस प्रकार परमनिरुद्धमरण का वर्णन सात गाथाओं में पूर्ण किया । इति नाम के ग्रन्थ में पंडितमरण के वर्णन में भक्तप्रत्याख्यानमरण का वर्णन पूर्ण हुआ ।
सदासुखदासजी