
एसा भत्तपइण्णा वाससमासेण वण्णिदा विधिणा ।
इत्तो इंगिणिमरणं वाससमासेण वण्णेसिं॥2036॥
कथन भक्त प्रत्याख्यान का किया संकुचित अरु विस्तार ।
अब इंगिनी मरण का वर्णन है संक्षेप और विस्तार॥2036॥
अन्वयार्थ : इस भक्तप्रतिज्ञा का विस्तार, संक्षेपरूप विधि द्वारा वर्णन किया । इससे आगे इंगिनी मरण को संक्षेपविस्तार पूर्वक वर्णन करेंगे । ऐसा इंगिनीमरण कहने की शिवकोटि स्वामी ने प्रतिज्ञा की है ।
सदासुखदासजी