णिप्पादित्ता सगणं इंगिणिविधिसाधणाए परिणमिया ।
सिदिमारुहित्तु भाविय अप्पाणं सल्लिहित्ताणं॥2039॥
निज-गण को इंगनिमरण आराधन हेतु करे तैयार ।
चढ़े विशुद्ध भावों की श्रेणी सल्लेखना करे स्वीकार॥2039॥

  सदासुखदासजी