परियाइगमालोचिय अणुजाणित्ता दिसं महजणस्स ।
तिबिधेण खमवित्ता सवालवुढ्ढाउलं गच्छं॥2040॥
दोषों का आलोचन कर आचार्य समक्ष कहे निज भाव ।
बाल, वृद्ध मुनिगणयुत संघ से करे त्रिविध क्षमा याचन॥2040॥

  सदासुखदासजी