सव्वं आहारविधिं जावज्जीवाय वोसरित्ताणं ।
वोसरिदूण असेसं अम्भंतरबाहिरे गंथे॥2046॥
जीवन-भर के लिए त्याग कर देता है सारे आहार ।
तथा समस्त बाह्य अभ्यन्तर परिग्रह का कर देता त्याग॥2046॥

  सदासुखदासजी