
आदितियसुसंघडणो सुभसंठाणे अभिज्जधिदिकवचो ।
जिदकरणो जिदणिद्दो ओघबलो ओघसूरो य॥2051॥
उत्तम संहनन संस्थान शुभ और अभेद्य कवच-धारी ।
महाबली अरु शूरवीर वह इन्द्रिय-निद्रा का विजयी॥2051॥
अन्वयार्थ : कैसे हैं इंगिनीमरण के धारक क्षपक ? आदि के तीन संहनन के धारक हैं । वज्रवृषभनाराच, वज्रनाराच और नाराच - ये आदि के तीन संहनन हैं । सुन्दर जिनका संस्थान हो, उपसर्ग-परीषहों से भेदे नहीं जायें - ऐसा धैर्य रूप जिनका बख्तर/कवच हो, इन्द्रियों को जीतने वाले हों, निद्रा को जीत लिया है, महान बलवान हो और अत्यंत शूरवीर हो, कायर न हों, उनके एकलविहारीपना होता है - इंगिनीमरण होता है ।
सदासुखदासजी