सव्वो पोग्गलकाओ सोक्खत्ताए जदि वि तमुवणमेज्ज ।
तध वि हु तस्स ण जायदि ज्झाणस्स विसेत्तिया को वि॥2055॥
तीन लोक के सारे पुद्गल-द्रव्य परिणमें यदि सुखरूप ।
सुखी करें उस धीर क्षपक को तो भी ध्यान न विचलित हो॥2055॥
अन्वयार्थ : जगत के समस्त पुद्गल समूह यदि सुख देने रूप परिणमें तो भी उन क्षपक को ध्यान से किंचित् भी चलायमान नहीं कर सकते ।

  सदासुखदासजी