एवं अट्टवि जामे अनुवट्टो तच्च ज्झादि एय मणो ।
जदि अधिच्चा णिद्दा हविज्ज सो तत्थ अपदिण्णो॥2060॥
इसप्रकार वह दिवस रात्रि जाग्रत रहकर हो चित् एकाग्र ।
ध्यान करे यदि निद्रा आ भी जाए तो कुछ निद्रा ले॥2060॥
अन्वयार्थ : इस प्रकार आठ प्रहर शयन क्रिया रहित एकाग्र मन होकर ध्यान करते हैं और यदि जबरदस्ती निद्रा आ जाये तो सोते नहीं अथवा तो कदाचित् अति अल्प निद्रा लेते हैं, उस समय प्रतिज्ञा/नियम नहीं जानना ।

  सदासुखदासजी