सज्झायकालपडिलेहणादिकाओ ण संति किरियाओ ।
जम्हा सुसाणमज्झे तस्स य झाणं अपडिसिद्धं॥2061॥
स्वाध्याय का नियतकाल या प्रतिलेखन विधि उसे नहीं ।
मृतक भूमि में ध्यानकार्य का उनके लिए निषेध नहीं॥2061॥
अन्वयार्थ : इस इंगिनीमरण करने वाले को स्वाध्याय काल में प्रतिलेखनादि/भूमि शोधना, दिशा आदि शोधनादि क्रिया नहीं है, इसलिए इनके श्मशान भूमि में भी ध्यान का निषेध नहीं है ।

  सदासुखदासजी