आवासगं च कुणदे उवधोकालम्मि जं जहिं कमदि ।
उवकरणपि पडिलिहइ उवधोकालम्मि जदणाए॥2062॥
किन्तु रात दिन की जो विधियाँ हैं वे उन्हें अवश्य करें ।
सावधान हो उपकरणों का प्रतिलेखन भी नित्य करें॥2062॥
अन्वयार्थ : दोनों कालों में शोधते-देखते, प्रतिलेखन करते हैं ।

  सदासुखदासजी