
उवएसो पुण आइरियाणं इंगिणिगदो वि छिण्णकधो ।
देवेहिं माणुसेहिं व पुठ्ठो धम्मं कधेदित्ति॥2067॥
इंगनिमरण करे मुनि तो भी कुछ आचायाब के अनुसार ।
सुर-नर यदि कुछ पूछें तो वे थोड़ा-सा उपदेश करें॥2067॥
अन्वयार्थ : आचार्य का यह उपदेश है कि इंगिनी संन्यास को प्राप्त मुनि कथा-आलाप नहीं करते तो भी देव-मनुष्य धर्मकथा पूछते हैं तो धर्म की बात कहते हैं ।
सदासुखदासजी