+ अब पंडितमरण का तीसरा भेद प्रायोपगमन, उसे नौ गाथाओं में कहते हैं - -
पाओवगमणमरणस्स होदि सो चेव वुवक्कमो सव्वो ।
वुत्तो इंगिणिमरणस्सुक्कमो जो सवित्थारो॥2070॥
पहिले इंगिनीमरण विधि का कथन किया विस्तार सहित ।
प्रायोपगमन संन्यास विधि भी जान लीजिए वैसी ही॥2070॥
अन्वयार्थ : इंगिनीमरण की जो विधि विस्तार सहित कह दी गई है, वही सम्पूर्ण विधि प्रायोपगमन मरण की होती है ।

  सदासुखदासजी